जानें, सरकारी विभागों के शब्दों का कौन करता है निर्माण… शब्दावली आयोग की 2 दिन की कार्यशाला सम्पन्न

हिंन्दी भाषा को समृद्ध करने और उसके शब्दों के मानक प्रवाह को बनाए रखने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय पिछले 55 सालों से ख़ास पहल कर रहा है, जिसके तहत वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग ने “पत्रकारिता का विकास एवं तकनीकी शब्दावली” पर 23 और 24 सितम्बर को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें शब्दावली आयोग ने तमाम पत्रकारिता के शिक्षकों और पत्रकारों के साथ आयोग के अधिकार और जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा हुई।

शब्दावली आयोग के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर अवनीश कुमार ने संगोष्ठी के पहले दिन औपचारिक शुरुआत करते हुए चर्चा को आगे बढ़ाया और आयोग के 55 साल के काम का लेखा-जोखा पत्रकारों और शिक्षक पत्रकारों के सामने रखा। शब्दावली आयोग के अध्यक्ष जब अपना विषय संगोष्ठी के सदस्यों के साथ रख रहे थे तो हर कोई हैरान सा था क्योंकि, ज़्यादातर लोगों को ये पता ही नहीं था कि रोजमर्रा के जीवन में वो जिन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं वो कितने ग़लत और भ्रामक हैं।

बाएं से प्रो. राम मोहन पाठक, डॉ प्रदीप माथुर, डॉ प्रमोद कुमार, प्रो. अवनीश कुमार, डॉ. गोरकोटी और डॉ. महावीर सिंह

शब्दावली आयोग के अध्यक्ष अवनीश कुमार ने बताया कि 55 साल से आयोग विभिन्न विषयों की शब्दावली तैयार करता आ रहा है, और अब इस बात की ज़्यादा ज़रुरत है कि अब इसका प्रचार-प्रसार किया जाये। इस दौरान अवनीश कुमार ने बताया कि शब्दावली आयोग कैसे एक ख़ास शब्द पर इतनी मेहनत करता है, और उनके बारे में पूरी जानकारी जुटाकर शोध कार्य के ज़रिये उन्हें मानक स्वरूप दिया जाता है।

चूंंकि, पत्रकारिता के ज़रिये ही शब्दोे का सबसे ज्यादा प्रचार और महत्व बढ़ता है, कई बार न्यूज़ रूम में ऐसी दिक्क़ते आती हैं कि किसी एक शब्द पर आपस में राय नहीं बनती। जिसे देखते हुए वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षक प्रो. राम मोहन पाठक, प्रो. प्रदीप कुमार माथुर, महाविद्यालयों, संस्थानों  से पत्रकारिता के विशेषज्ञों को बुलाया गया जिन्होंने शब्द और उसके निर्माण को कैसे लोगों के सामने रखा जाए उस विधा पर प्रकाश डाला।

सत्र की अध्यक्षता कर रहे आयोग के अध्यक्ष अवनीश कुमार ने मानक शब्द निर्माण कर उनके चलन को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग किया है। अब आयोग की मोबाइल ऐप डानलोड करके आदमी कहीं भी कहीं भी भाषा के शब्द, व्याकरण और भाव  को बोल सकता है और उन्हें डाउनलोड भी कर सकता है।

कार्यक्रम का उद्घाटन 23 सितम्बर को किया गया जिसमें सत्र के मुख्य अतिथि डॉ सतीश चंद्र गोरकोटी (अधिशिक्षक जेएनयू), विशिष्ट अतिथि डॉ प्रमोद कुमार कुलसचिव (जेएनयू), विशिष्ट अतिथि डॉ. महावीर सिंह पूर्व निदेशक (आकाशवाणी और दूरदर्शन) रहे जबकि सत्र की अध्यक्षता शब्दावली आयोग के अध्यक्ष अवनीश कुमार ने की।

वहीं, समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिवाकर खरे ( मीडिया निदेशक, मुख्य सचिव, यूपी सरकार) ने सभी प्रतिभागियो को विशेष संबोधन दिया और उन्हें प्रमाण पत्र भी सौंपे।

संगोष्ठी में देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभागियों ने भाग लिया I इन दो दिनों में पत्रकारिता का विकास एवं तकनीकी शब्दावली निर्माण पर प्रकाश डालने के लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकार के विभिन्न विश्वविद्यालयों ,महाविद्यालयों ,संस्थानों आदि से संसाधकों/विशेषज्ञो को आमंत्रित किया गया था । आमंत्रित व्याख्यानदाताओं में  पत्रकार शिक्षक प्रो राम मोहन पाठक, प्रो प्रदीप कुमार माथुर, डॉ महावीर सिंह श्री सुधीर के रिंटन, श्रीमती रेनू सिंह, डॉ अमिताभ श्रीवास्तव आदिरहे जिन्होंने ने अपने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये I निश्चित रूप से इस आयोजन से देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभागियों/ मीडिया कर्मियों को इस संगोष्ठी से लाभ हुआ ।

वहीं, आयोग की ओर से कार्यक्रम के निर्देशन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रभारी अधिकारी श्री शिव कुमार चौधरी जबकि  संचालन और समन्वय के  लिए श्रीमती चक्प्रम बिनोदिनी देवी , इंजी. जयसिंह रावत  और सहायक वैज्ञानिक अधिकारी ने निभाई।

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