झारखंड की केन्द्रीय यूनिवर्सिटी के कई पदों पर गड़बड़ी का आरोप.. अधिकारी RSS के ख़िलाफ़ चला रहे हैं मुहिम

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झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी केंद्र ने यह सोचकर बनाया था कि आदिवासी बहुल इलाकों में भी उचित, और अच्छी शिक्षा दी जा सके लेकिन इस यूनिवर्सिटी की बदकिस्मती ही कहें कि यह कभी विवादों से बाहर रही नहीं पाती है। अक्सर विवादों में रहने वाली यूनिवर्सिटी के खिलाफ सीबीआई की जांच चल रही है जिसमें यूनिवर्सिटी के बड़े-बड़े पदाधिकारी  पर भी जांच की गाज गिर रही है।

स्टिंग फुटेज़ से ली गई तस्वीर

हाल के दिनों में झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी में भारी संख्या में टीचिंग और नॉन टीचिंग दोनों पोस्ट पर वैकेंसी निकली थी हर कोई यूनिवर्सिटी के पदाधिकारी चाहते थे कि वह अपने अपने उम्मीदवारों को इसमें भरवा सके या यूं कहें उनका चयन हो सके।  यूनिवर्सिटी का जो ट्रैक रिकॉर्ड है वह काफी खराब है इसीलिए जांच एजेंसियों की भी निगाहें थी। जो हमारे सूत्रों से जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक जांच एजेंसियों ने टीचिंग और नॉन टीचिंग के यूनिवर्सिटी की वैकेंसी के इंटरव्यू का स्टिंग ऑपरेशन कराया है ।

स्टिंग फुटेज़ से ली गई तस्वीर

इस स्टिंग ऑपरेशन में हमारे सूत्र बताते हैं कि जो एक्सटर्नल बाहर से आए थे  और उन्होंने यूनिवर्सिटी के मेंबर्स से उन लोगों के कमरे से लेकर नाश्ते के टेबल तक और साथ में इंटरव्यू के कमरे से लेकर जहां पर दस्तावेज के वेरिफिकेशन हो रहा था उन सभी जगहों का स्टिंग ऑपरेशन कराया है । बताया जा रहा है कि लगभग 2 दर्जन से ज्यादा इस मामले की CD है उसके कुछ अंश हमारे पास हैं हम उसका वीडियो रूप आपको अपलिंक नहीं कर रहे हैं लेकिन उसका इमेज बनाकर कुछ तस्वीर आपके सामने रख रहे हैं जिसमें यह पता चलता है कि इंटरव्यू कक्ष में जो लोग बैठे हैं उसके सामने इंटरव्यूअर है।

चयनित अधिकारी सरकार के ख़िलाफ़ चला रहे हैं एजेंडा

कुल मिलाकर एक बात और भी सामने आ रही है कि जिन लोगों का चयन हुआ है उनके बारे में भी यह बताया जाता है कि वह यूनिवर्सिटी के कुछ बड़े अधिकारी ने अपनी मनमर्जी की जिनका विचारधारा के तौर पर जो भारत के प्रधानमंत्री को गाली देता है भारत की बहुसंख्यकों की को गाली देता है उसकी फेसबुक पोस्ट को भी हम शामिल कर रहे हैं, इसी तरीके से कई और नियुक्तियां हुई हैं इन नियुक्तियों की जांच जांच एजेंसियां कर रही है और आने वाले दिनों में यूनिवर्सिटी के बड़े-बड़े पदाधिकारियों की अगर गिरफ्तारी हो तो इसमें कोई हैरानी नहीं होगी ।

अधिकारी मोदी सरकार पर साध रहे हैं निशाना

बताया जाता है कि यूनिवर्सिटी में जो बड़े पदाधिकारी हैं वह लोग उनकी नियुक्ति ही एक विचारधारा की वजह से हुई लेकिन जिस तरह की भर्तियां हुई हैं उससे यह पता चलता है कि उन्होंने विचारधारा को कि विपरीत जाकर नियुक्ति की और ऐसे लोगों की नियुक्ति की जो कि केंद्र के सरकार के खिलाफ नरेंद्र मोदी के खिलाफ यहां तक की विचारधारा उस विचारधारा को गाली देने का काम किया जिसका जिक्र उनकी फेसबुक प्रोफाइल में मिलता है, ऐसे लोगों की नियुक्ति पर कई सवाल उठ रहे हैं ।

सवाल यूनिवर्सिटी के एक बड़े अधिकारी के ऊपर भी उठ रहा है यह भी बताया जा रहा है कि झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी की नौकरी के लिए जब एडवर्टाइजमेंट निकला उसके बाद पूरे आसपास के इलाके में और एकेडमिक सर्किल में हर वैकेंसी के लिए एक रेट तय था और और बताया जा रहा है कि इसके लिए हर एक पद के लिए लगभग 15 से 20 और ग्रेड-1 के लिए 35 से 50 लाख तक दी रकम की मांग की जा रही थी ।

जांच एजेंसियों ने जिस तरह से स्टिंग किया है उससे ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां होंगी लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि झारखंड जैसे पिछड़े इलाके में जिस मकसद से केंद्र की सरकार ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी उसका मकसद पूरी तरीके से इस तरह के लोगों की वजह से साकार नहीं हो सका।

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