गौरी लंकेश की हत्या पर हंगामा करने वाले दोगले बुद्धिजीवियों पर भड़कीं मालिनी अवस्थी… हिंदी भाषाईयों को दिखाया आईना।

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बेंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर हंगामा करने वालों को लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने जमकर फटकार लगाई है, मालिनी ने एक फेसबुक पोस्ट लिखकर अपनी बात रखी है। मालिनी इस बात से ख़ासी नाराज़ हैं कि गौली लंकेश की हत्या के बाद सिर्फ कुछ लोग एक एजेंडा की तरह गौरी लंकेश की हत्या पर भी सियासत कर रहे हैं।

मालिनी इस बात से भी नाराज़ हैं कि गौरी लंकेश की हत्या के बाद संभ्रांत वर्ग में उपजा ये विरोध सिर्फ़ इसलिए है क्योंकि वो अंग्रेज़ी में लिखती थीं, और सिर्फ़ इसीलिए गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में ज़्यादातर लेखक और पत्रकार जो आंदोलन कर रहे हैं वो भी सिर्फ अंग्रेज़ी भाषी हैं। मालिनी का गुस्सा इसलिए भी जायज है क्योंकि ये अंग्रेज़ी दां और कथित बुद्धिजीवी किसी हिंदी पत्रकार की हत्या या मौत पर सहानुभूति के दो शब्द तक नहीं बोलते।

गायिका मालिनी अवस्थी लिखती हैं कि-

वास्तव में भारत को सबसे पहले, औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त कराना होगा
आज भी, बड़ा आदमी वही, जो अंग्रेजी में बोले, लिखे!
जा रे हिन्दी भाषियों, तुम्हारी भी कोई वक़त है!
न तुम्हारे लिखने पर, न तुम्हारे ख़ामोश संघर्ष पर, न तुम्हारी हत्याओं पर!
यू पी बिहार में सच का पर्दाफ़ाश करने का जिगर रखने वाले कितने ही खामोश कर दिए,
क्यों, कोई उन पर लिखे, सवाल उठाए, आँसू बहाए, क्यों हो शोकसभा, और राजकीय सम्मान तो क़तई नही।
हिंदी की हैसियत ही क्या है…
वही भारतीय संस्कृति पर गर्व करनेवाले गंवार हम सब!

हमारी मौतें भला कोई मौतें हैं!

आज से पितृ पक्ष आरम्भ है। आज चीत्कार करने वालों ने संभवतः आप सबका नाम न सुना होगा, या आप सबकी अकाल हत्याओं को उस अखबार की एक खबर भर समझा हो, जो दो घंटे बाद कूड़ेदान में फेंक दिया जाता हो।
हिन्दी भाषी हैं ही क्या, क्या हैसियत है हमारी, कि हमारे लिए कोई आंदोलन छिड़ जाए!

नमन राजेश वर्मा
नमन जगेन्द्र सिंह
नमन संदीप कोठारी
नमन संजय पाठक
नमन हेमंत यादव
नमन राजदेव रंजन

कई सदियां लगेगीं इस औपनिवेशिक संस्कृति का मुलम्मा उतरने में। …
अगले जनम में अंग्रेज़ी में बोलना, लिखना, बिछना,बिछाना!!

बता दें कि 5 सितंबर की रात को कर्नाटक के बेंगलुरु में गौरी लंकेश की अज्ञात बदमाशों ने उनके घर के बाहर ही गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसके बाद से कथित बुद्धिजीवियों की एक बिरादरी इसे सिर्फ इसलिए मुद्दा बना रही है क्योंकि वो एक विशेष विचारधारा से संबंध रखती थीं।

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