भारत में मुस्लिमों की नमाज के लिए लोग गुरुद्वारा दे देते हैं… और पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों में कुर्बानी के ऊंट बांधे जाते हैं, फिर भी लोगों को यहां असहिष्णुता दिखती है

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भारत में मुस्लिमों की नमाज के लिए लोग गुरुद्वारा दे देते हैं… और पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों में कुर्बानी के ऊंट बांधे जाते हैं, फिर भी सेकुलरों को यहां असहिष्णुता दिखती है। पाकिस्तान कितना धर्म निरपेक्ष है और वहां हिंदू अल्पसंख्यकों का क्या हाल है ये साफ हो जाता है वहां के के मंदिरों से आई तस्वीरों से। पाकिस्तानी पत्रकार ने एक विडियो ट्वीट किया है जिसमें साफ दिख रहा है कि हिंदू मंदिरों में बकरीद से पहले कुर्बानी के लिए लाए गए ऊंटों को बांध दिया जाता है।

मामला बकरीद से एक दिन पहले का है जब कराची के एक मंदिर में बकरीद में कुर्बानी के लिए लाए गए ऊंटों को मंदिर के अंदर बांध दिया गया। मामला तब प्रकाश में आया जब पाकिस्तानी अख़बार एक्स्प्रेस ट्रिब्यून के न्यूज़ एडिटर बिला फ़ारुकी ने ट्विटर पर एक विदियो शेयरकिया जिसमें कथित तौर पर कराची के एक मंदिर में ऊंट बैठे दिख रहे हैं। बिलाल ने कोई चंद्र प्रकाश खत्री के हवाले से से वीडियो साभार लिखकर शेयर किया है। पाकिस्तानी पत्रकार के शेयर किए गए विडियो में मंदिर के अंदर ऊंट और ऊंट के अलावा मोटरसाइकिल रखी नज़र आ रही है। बिलाल ने ट्वीट कर लिखा कि ‘कराची एयरपोर्ट के पास एक हिंदू मंदिर में मुसलमानों ने बलि के जनवर रखे गए हैं’। बिलाल ने घटना को शर्मनाक बताते हुए इस ट्वीट को अल्पसंख्यक हैशटैग के साथ ट्वीट किया है। उनके ट्वीट को करीब चार हज़ार लोगों ने रिट्वीट किया है और इसी के साथ पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर भी ट्वीटर पर बहस शुरु हो गई है।

 

वहीं, भारत में मुस्लिमों की नमाज के लिए सिक्ख लोग अपने गुरुद्वारे दे देते हैं, लेकिन लोगों में पाकिस्तान परस्ती इस क़दर सवार है कि उन्हें अपने देश में ही असहिष्णुता नज़र आती है।  वाकया ईद उल अजहा के दिन का है जब उत्तराखंड के चमोली के जोशीमठ में बारिश के कारण मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गुरुद्वारे में नमाज अदा की.

दरअसल, चमोली जिले के जोशीमठ में रात भर से भारी बारिश हो रही है. इस वजह से ईद पर खुले मैदान में नमाज पढ़ना मुश्किल हो रहा था. बारिश को देखते हुए जोशीमठ के गुरुद्वारे प्रबंधक ने मुस्लिम भाइयों से गुरुद्वारे में नमाज अता करने के लिए आमंत्रित किया।

इसके बाद गुरुद्वारे में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ईद-उल-अजहा की नमाज पढ़ी. नमाज के बाद अन्य धर्म के लोगों ने भी ईद की मुबारक दी और एक दूसरे के गले लगे।ये पहली बार नहीं है जब गुरुद्वारे की ओर से एकता की ये मिसाल पेश की गई हो. साल 2012 में भी बारिश के चलते गुरुद्वार में नमाज पढ़ी गई थी।

 

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