अटल जी के बाद PM मोदी की दूरदृष्टि का परिणाम है मोदी सरकार का नया मंत्रिमंडल विस्तार… जानिए, कैसे ?

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अटल जी के बाद मोदी सरकार का नया मंत्रिंमडल विस्तार PM मोदी की दूरदृष्टि का परिणाम है क्योंकि मोदी सरकार को इंडिया फर्स्ट और न्यू इंडिया के संकल्प के साथ आगे बढ़ना है इसलिए, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस का उदाहरण पेश किया है।

अटल जी की सरकार ने मंत्रियो की संख्या पर एक कैप लगाकर सरकारी लूट और राजनितिक गठजोड़ पर एक हद तक लगाम लगाने की कोशिश जरूर जरूर की थी । लेकिन यह पहलीबार हुआ है कि वित्त मंत्री के अधीन ही कंपनी मामले के मंत्रालय सम्बद्ध है। यह देश वित्त मंत्री चिदंबरम के साथ प्रेम गुप्ता (आर जे डी ) को कंपनी मामले का मंत्री बनते हुए देख चुका है। आज एक नितिन गडकरी के जिम्मे रोड ट्रांसपोर्ट ,हाईवे ,शिपिंग ,जलसंसाधन और गंगा मंत्रालय है। यानी एक मंत्री एक सचिव के अनतर्गत इतने मंत्रालय चलेंगे जो आपस में कनेक्टेड हैं। हालाँकि इस प्रक्रिया में अभी कुछ और मंत्रालय सम्बद्ध हो सकते हैं जिनका जॉब और नेचर लगभग एक है।

इससे पहले कई वरिष्ठ पत्रकारो ने कई मंत्रालयों को सफ़ेद हाथी का दर्जा दिया था। कुछ पत्रकारों ने आर टी आई के जरिये मंत्रालयों के बजट और परफॉरमेंस का विश्लेषण किया था लेकिन किसी सरकार ने उन फजूल खर्ची और अनुपयुक्त मंत्रालयों को बंद करने की हिम्मत नहीं दिखाई। यथास्थिति बनाये रखने की जिद ठान चुकी नौकरशाही सिस्टम बदलने को राजी नहीं है ,हर जगह नियमो का हवाला देकर नौकरशाही अपनी प्रभुत्व कायम रखना चाहती। लेकिन इस दौर में अगर कई वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट को समय से पहले छुट्टी की जा सकती है तो मंत्रियो की क्यों नहीं ? लेकिन हमने मान लिया है कि यह पहले नहीं होता था ,इसलिए कभी नहीं होगा।

पी एम मोदी यह जानते है कि देश ने इतना बड़ा मैंडेट उन्हे बदलाव के लिए दिया है। आम जनता सिस्टम में बदलाव चाहती है यथास्थिति के मकड़जाल को तोडना चाहती है। डोकलाम और दूसरे विदेशी फ्रंट पर इस सरकार ने अपनी स्थति स्पष्ट कर ली है। लेकिन अंदरूनी हालात बदलने की स्थति बनी हुई है। सामाजिक बदलाव सरकार की कई मुश्किलों को आसान बना रही है। इंडिया फर्स्ट और न्यू इंडिया सिर्फ नारा बनकर न रह जाए यह चुनौती मोदी सरकार के सामने जरूर है

 

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