राम रहीम का खु़ुलासा करने पर इस पत्रकार को मार दिया गया था… 15 साल से बेटे को इंसाफ़ का इंतज़ार

राम रहीम के 20 साल जेल में बुक होने के बाद डेरा की रेप पीड़ितों को तो न्याय मिल गया है, लेकिन आज से 15 साल पहले इस पूरे मामले का ख़ुलासा कर अपनी जान गंवाने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के परिवार को अभी भी उनके न्याय का इंतज़ार है। क्योंकि, रामचंद्र छत्रपति का पीड़ित परिवार अभी भी पिछले 15 सालों से लगातार अपनी लड़ाई अकेले लड़ रहा है।

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति

अपने अख़बार में बलात्कार पीड़ित साध्वी की प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और हाईकोर्ट की लिखी चिट्ठी छापने की वजह से 24 अक्टूबर साल 2002 में घर के बाहर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

इसी अख़बार में छापी थी साध्वी के रेप की चिट्ठी
इसी अख़बार में छापी थी साध्वी के रेप की चिट्ठी

राम रहीम को सज़ा मिलने के बाद एक बार फिर से ये मामला सबके सामने आाया है, जिसके बाद दिवंगत पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने मीडिया को बताया कि उनके पिता पत्रकार से पहले एक वकील थे और उन्होंने कई मीडिया संस्थानों के साथ काम किया था। लेकिन, वो इन मीडिया संस्थानों के साथ काम करके खुश नहीं थे क्योंकि, बड़े संस्थानों में सच का कोई वजूद नहीं होता। लिहाज़ा अपने काम को पूरी ईमानदारी से करने के लिए उन्होंने ‘पूरा सच’ नाम से अख़बार निकालना शुरु किया और फिर उसी अखबार में आज से 15 साल पहले राम रहीम के ख़िलाफ़ उनकी आश्रम की साध्वियों का लिखा पत्र छापा।

रामचंद्र के बेटे अंशुल छत्रपति
रामचंद्र के बेटे अंशुल छत्रपति

न्यूज़ एजेंसी ANI के मुताबिक़ राम रहीम के ख़िलाफ़ लिखने और सच का साथ देने की वजह से उनके पिता को कई बार धमकाया गया। लेकिन, तब तक पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस चिट्ठी का स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिये थे।

गुमनाम साध्वी द्वारा लिखा गया पत्र
गुमनाम साध्वी द्वारा लिखा गया पत्र

 

अंशुल बताते हैं कि इसी के बाद उनके पिता पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को दो लोगों ने पांच गोलियां मारी थीं उस वक़्त वो महज 21 साल के थे और उन्हें ये तक नहीं पता था कि न्याय पाने के लिए वो कहां जाएं किसके ख़िलाफ़ जाएं क्योंकि पुलिस ने मामले में डेरा के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया था।

wp-image-1984110475

अंशुल के मुताबिक़ अस्पताल में करीब 28 दिनों तक मौत से लड़े, लेकिन राम रहीम के ख़िलाफ़ उनके बयान देने के बावजूद पुलिस ने एफआईर में उनका नाम तक नहीं लिखा, जबकि जिस रिवॉल्वर से मेरे पिता को मारा गया था वो डेरा सच्चा सौदा के नाम पर रजिस्टर थी।

पूरे मामले में डेरा प्रमुख राम रहीम की उलटी गिनती उस वक़्त शुरु हुई जब सीबीआई ने 12 दिसंबर 2002 को धारा 376, 506, और 509 के मामले में केस दर्ज किया और जांच शुरु की। बता दें कि, इन्हीं मामलों में डेरा प्रमुख राम रहीम को सीबीआई अदालत की तरफ से 20 साल जेल के लिए भेजा गया है।

 

Team GI

Team GI is a group of committed individuals with National Interest in mind.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *