अपने कार्यकाल के पहले दिन देश के 13वें उपराष्ट्रपति ने क्या कहा.. जानें, वेंकैया के दिल में क्या है ?

11 अगस्त को देश के 13वें उपराष्ट्रपति के तौर पर वेंकैया नायडू ने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है। राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण करने के बाद उपराष्ट्रपति वेंंकैया नायडू राज्यसभा पहुंचे और मॉनसून सत्र के आखिरी दिन  बतौर सदन के सभापति के रुप में उच्च सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया।

इस दौरान सभापति के तौर पर राज्यसभा में अपने पहले संबोधन में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि वो किसी एक पार्टी के नहीं बल्कि सभी दलों के सभापति हैं। वेंकैया नायडू ने निष्पक्षता के साथ सदन की परंपराओं और कार्य पद्धति में सुधार का भी भरोसा दिलाया। वेंकैया नायडू ने कहा कि ये उनके दिल की बाते हैं।

सौ. राज्यसभा टीवी

वेंकैया ने कहा कि मैं पहली बार 1958 में सदन में आया था और कभी सोचा नहीं था कि मेरे जैसे आम आदमी पर भी ये जिम्मेदारी डाली जा सकती है और ये एक तरह से लोकतंत्र का चमत्कार ही है। वेंकैया ने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं एक किसान का बेटा हूं, मैं दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करूंगा। मैं किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि सभी पार्टियों का हूं। नायडू ने कहा कि ‘मुझे किसी परिवार का समर्थन नहीं है। मैं बेहद सामान्य परिवार से आया हूं। मैं सभी सदस्यों से अपील करता हूं कि वे देश के नागरिकों के चेहरे पर मुस्कान सुनिश्चित करें।’

राज्यसभा में वेंकैया के सम्मान में शेर पढ़ते हुए पीएम मोदी
राज्यसभा में वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

विपक्ष की शंका पर वेंकैया नायडू ने साफ किया कि वो नहीं मानते कि विपक्ष की कोई भूमिका नहीं है। लेकिन, विपक्ष सरकार की ओर से सदन के पटल पर आए विधेयक पर चर्चा करे, बहस करे और विधेयक पारित हों। जिससे शोरगुल में विधेयक पास कराने की स्थिति नहीं आएगी। वेंकैया ने कहा कि विपक्ष जनता के मुद्दे उठाने को स्वतंत्र है और हम दुनिया की विकसित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं इस भूमिका को ध्यान में रखकर सबको एक साथ चलना होगा।

वहीं मीडिया वेंकैया नायडू ने कहा कि मीडिया केवल सनसनीखेज और नकारात्मक ख़बरों को अधिक महत्व देता है। वेंकैया ने कहा कि मैंने इसी सदन में बड़ी तैयारी के साथ कृषि पर 57 मिनट बोला लेकिन अगले दिन अख़बारों को देखकर बड़ी निराशा हुई क्योंकि ख़बरें पूरी तरह से गायब थीं।

 

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