मुस्लिमों पर दिये अपने बयान के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स के निशाने पर आए हामिद अंसारी

उपराष्ट्रपति कार्यकाल ख़त्म होने से एक दिन पहले राज्यसभा टीवी को दिए अपने इंटरव्यू में मुस्लिमों पर दिए बयान के बाद सोशल मीडिया पर हामिद अंसारी यूज़र्स के निशाने पर आ गए हैं। देश में मुस्लिमों में असुरक्षा की भावना बताने पर सोशल मीडिया पर लोग हामिद अंसारी पर तरह-तरह की फ़ब्तियां कस रहे हैं।

संघ विचारक राकेश सिन्हा लिखते हैं कि हामिद अंसारी जी क्या आपको नहीं लगता कि भारत विभिन्नता का उत्सव मनाता है, क्योंकि हिंदू सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को अपनाते हैं जो कि उदार है और समावेशी है।

वहीं, अभिनेता परेश रावल फैन क्लब लिखते हैं कि श्रीमान हामिद अंसारी बिल्कुल सही कहते हैं कि भारतीय मुस्लिम डरे हुए हैं, देखो एक मासूम मुस्लिम को कैसे जबर्दस्ती उपराष्ट्रपति बनाकर 10 साल तक ऐशो-आराम की ज़िंदगी दी गई।

तो, श्वेता सिंह नाम की एक यूजर लिखती हैं कि उपराष्ट्रपति पद को जीने वाली शख़्सियत क्या हिंदुओं की असुरक्षा का ख़्याल रखती है। मुस्लिम तुष्टिकरण कमजोरी और बीमार मानसिकता है।

रिपब्लिक टीवी के पत्रकार आदित्य राज कौल तंज कसते हुए लिखते हैं कि अपने कार्यकाल के आखिरी दिन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को अचानक लगने लगा कि देश में मुस्लिम बेचैन और असुरक्षित हैं। वाकई सोचो, 10 साल में क्या हुआ होगा।

ज़ुबीना अहमद नाम की एक यूज़र लिखती हैं कि हामिद अंसारी को उपराष्ट्रपति की जगह किसी मदरसे का मौलवी होना चाहिए।

फ़िल्म निर्माता अशोक पंडित का कहना है कि हामिद अंसारी ने अपने बयान से सिद्ध कर दिया कि कांग्रेस कैसे देश के अहम पदों पर ख़तरनाकर देशविरोधी सांप्रदायिक लोगों को बैठाती है।

टीवी पत्रकार अनुराग मुस्कान लिखते हैं कि असहिष्णुता अवसरवादी होती है वरना जिस देश में अब्दुल कलाम के मुसलमान सुरक्षित थे उसी में हामिद अंसारी के मुसलमान असुरक्षित कैसे हो सकते हैं।

पत्रकार रोहित सरदाना ने लिखा कि और डरते डरते राष्ट्रपति/ उपराष्ट्रपति तक बन गए! धन्य हो महाराज

तो, फेसबुक पर अमित चतुर्वेदी ने लिखा कि लगातार 10 सालों तक भारत का उपराष्ट्रपति रहने के बाद हामिद अंसारी को अपने रिटायरमेंट वाले दिन लगता है कि देश मे मुसलमान ख़तरे में है। इससे शर्मनाक बात कुछ औऱ हो नहीं सकती। कोई उनसे पूछे कि उन्हें ऐसा कबसे लगना शुरू हुआ, और जब उन्हें ऐसा लगना शुरू हुआ, तो उन्होंने क्या किया? क्योंकि उनके 10 वर्ष के कार्यकाल के शुरुआती 7 साल तक तो UPA का ही शासन था।

हालांकि वो सोच रहे होंगे कि रिटायरमेंट होते होते वो अपने नमक का कर्ज उतारें…लेकिन ऐसा कहकर वो अपनी पसन्दीदा पार्टी के हिस्से के कुछ % वोट और कम करा देंगे। असल मे कांग्रेस अभी भी नहीं समझ रही है। उनके “सेकुलरिज्म” का अब दम निकल चुका है, राजनीति में ये शब्द अपने मायने खो चुका है। जनता का मिज़ाज़ समझिये, वो अपीज़मेंट के झुनझुनो से उकता चुकी है, मुसलमानों को कोई ख़तरा नहीं है, लेकिन ऐसे वक्तव्य हिन्दू मुस्लिमों के बीच की खाई बढाते हैं, पर ऐसे वक्तयों से मुसलमान तो नहीं, बॉर्डर लाइन पर खड़ा कांग्रेस का हिन्दू वोट जरूर खतरे में आ जायेगा

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एक दूसरी पोस्ट में अमित चतुर्वेदी ने लिखा कि ये मुख़्तार अंसारी है, यूपी का कुख्यात डॉन, जिसके ऊपर बीजेपी के एक बड़े नेता और तत्कालीन विधायक कृष्णानन्द राय की हत्या का इल्ज़ाम है।पता नहीं आपमें से कितने लोग जानते हैं ये बात कि ये मुख्तार अंसारी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के कज़िन हैं। अब जब तक एक मुसलमान गैंगस्टर एक हिन्दू विधायक की हत्या कर रहा था, तब हिन्दू खतरे में नहीं थे, लेकिन अब जाने ऐसा क्या हुआ कि मुसलमान खतरे में आ गए।मोदी जी को अब सबसे पहले कम से कम इस मुसलमान, मुख़्तार को तो इस ख़तरे का अहसास दिलवाना ही चाहिए… सत्ता की हनक औऱ इक़बाल भी कोई चीज़ होती है।

 

 

 

 

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