वोट के लिए कश्मीर को स्वात घाटी न बनाईये… महबूबा मैडम

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    Sharess
वोट के लिए कश्मीर को स्वात घाटी न बनाईये… महबूबा मैडम, कश्मीर में पिछले हफ़्ते अनंतनाग में पुलिस के एक अफ़सर फ़िरोज़ डार और उनके सिपाहियों की हत्या और अब इस हफ़्ते श्रीनगर में एक और पुलिस अधिकारी मो. अयूब पंडित की पीट-पीटकर हत्या। यानी हफ़्ता दर हफ़्ता चुन-चुनकर पुलिस अधिकारी मारे जा रहे हैं और राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती का “सब्र का पैमाना छलक रहा है”।
इन घटनाओं के बाद CM महबूबा कह रही हैं कि ” सब्र का पैमाना छलक रहा है और जिस दिन सुरक्षाबलों को ढील मिली उस दिन का अंदाज़ा लोग ख़ुद लगा सकते हैं। लेकिन, इस दौरान मैडम ये भूल गईं कि इनके इसी सब्र ने साऊथ कश्मीर को लगभग स्वात वैली बना दिया है। ये वही महबूबा हैं जो वोट के लिए हिज़्बुल मुज़ाहिद्दीन के दहशतगर्तों की मौत पर उनके घर मातम मनाने जाती थीं, और आज इस काम के लिए उन्होंने “जमात” को आज़ादी दे दी है।
DSP अयूब को श्रदांजलि देती हुई CM महबूबा मुफ़्ती
DSP अयूब को श्रदांजलि देती हुई CM महबूबा मुफ़्ती
कश्मीर में लोकतांत्रिक सरकार जरुरी है, जम्हूरियत पर लोगों का भरोसा कायम हो इसके लिए रियासत में पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने फ्री एंड फेयर इलेक्शन को पुख़्ता बनाया था। लेकिन, आज अपने वोट के लिए ज्यादा सजग महबूबा ने भीड़ को बेकाबू बना दिया है। जम्मू-कश्मीर के दूसरे खित्ते में सरकार मजबूती से काम कर रही है।लेकिन, महज़ चार जिलों की हिंसा कहीं मासूमों की जान ले रही है तो, कहीं अयूब और फ़िरोज़ डार जैसे जांबाज़ मर रहे हैं।
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ये वही कश्मीर है जहां पंचायत प्रधानों को अब तक कोई अधिकार नहीं मिले हैं, क्योंकि धारा 470 बहाना है। लेकिन, पाकिस्तान की शह पर आग उगलने वाले पत्थर चलाने वाले को पूरी आज़ादी है।कश्मीर पर बातचीत करने वाले वही लोग हैं जो खुद कानून व्यवस्था के मामले में पूरी तरफ फेल रहे हैं। अटल जी ने संविधान के दायरे से आगे बढ़कर इंसानियत के दायरे में बातचीत की पहल की थी। आज भी कश्मीर पर केंद्र की पॉलिसी लगभग वही है।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि अलगाववाद की टोंटी पाकिस्तान के हाथ में है, कि कब कितना ढीला और टाइट होगा ये सिर्फ पाकिस्तानी फ़ौज जानती है। लेकिन, अलगाववादियों की सीमा और आज़ादी क्या हो ये इस देश का मीडिया तय नहीं करेगा बल्कि इसे मकामी हुक़ूमत को तय करना है।

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