RSS के संस्थापक डॉ. हेडगेवार की पुण्यतिथि आज… 92 साल पहले इसलिए की थी RSS की स्थापना

आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के संस्थापक डॉ. केशवराम बलिराम हेडगेवार की पुण्यतिथि है, करीब 92 साल पहले 27 सितंबर 1925 को डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने विजयादशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।  RSS 90 साल से भी ज्यादा पुराना संगठन है, लेकिन संघ के इतिहास के बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं कि आख़िर डॉ. हेडगवार जी को संघ की स्थापना क्यों करनी पड़ी और आख़िर वो कौन सी बातें हैं, जिन्होंने डॉ. हेडगेवार को RSS के गठन के लिए प्रेरणा दी ?

 

RSS की प्रमुख किताब मान बिंदु के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी ने राष्ट्र की समोन्नति के लिए अपना पूरा जीवन होम कर दिया। देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए डॉ. हेडगेवार ने समकालीन सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक और क्रान्तिकारी आंदोलनों का ना सिर्फ नेतृत्व किया, बल्कि उनमें क्रान्तिकारी भूमिका भी निभाई और धीरे-धीरे डॉ. हेडगेवार जी ने अपने अध्ययन में ये पाया कि, राष्ट्र की परतंत्रता के लिए कौन-कौन से कारण उत्तरदायी हैं।

Keshav-Baliram-Hedgewa

इसके लिए, डॉ. हेडगेवार जी ने सबसे पहला कारण आत्मकेंद्रित समाज का होना बताया.. यानि कि, हिंदुत्व की श्रेष्ठता, गौरवशाली अतीत और ऱाष्ट्रीय एकात्मकता और सामाजिक समरसता के भाव को भूल जाना राष्ट्र की परतंत्रता का पहला बड़ा कारण है।

जबकि, दूसरा सबसे बड़ा कारण व्यक्ति का आत्मकेंद्रित हो जाना है.. यानि, स्वार्थ भाव की प्रबलता, समाज हित की अवहेलना और एकाकी भाव का प्रभावी होना है।

इसके अलावा राष्ट्र की परतंत्रता के लिए तीसरा सबसे बड़ा और मुख्य कारण जो हेडगेवार जी ने बताया वो है सामूहिक अनुशासन का अभाव।यानि कि, भारत देश पर पहले मुस्लिम और फिर ब्रिटिश शासन के दुष्परिणाम सामने आए…जैसे, लोगों में आत्महीनता का भाव सामने आया और लोग स्वयं को हिंदू कहलाने में लज्जा का अनुभव करने लगे…जिसके लिए, मुस्लिम समुदाय को साथ लेने के लिए राष्ट्रीयता के सिद्धान्त और मान बिंदुओं को छोड़ने और संगठन का अभाव प्रमुख बाते हैं।

पुस्तक के मुताबिक संघर्ष के दौर के अपने इन अनुभवों के बाद डॉ. हेडगेवार जी ने स्वर्णिम भारत के लिए घोषणआ की, कि भारत हिन्दू राष्ट्र है और सिर्फ शक्ति के द्वारा ही सभी कार्य संभव किये जा सकते हैं… और शक्ति संगठन में निहित होती है…ऐसे में डॉ. हेडगवार जी ने इसके लिए एक ऐसे संगठन की कल्पना की.. जिसमें, स्वाभिमानी, संस्कारित, अनुशासित, चरित्रवान, शक्ति सम्पन्न, देशभक्ति से ओत-प्रोत और व्यक्तिगत अहंकार से मुक्त लोग शामिल हों… जो कि, राष्ट्र पर आने वाली हर विपत्ति का सामना कर सकें…और इस विचार से संघ कार्य प्रारंभ हुआ.. और इसके लिए डॉ. हेडगेवार जी ने संगठन के निमित्त शाखा रुपी अभिनव पद्धति को विकसित किया।

डॉ. हेडगेवार जी की कल्पना में सिर्फ हिंदू समाज में ही नहीं.. बल्कि, सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठन करना जरूरी था और इसके लिए विशेष गुणयुक्त हर कहीं स्वयंसेवक तैयार हों, और इसी उद्देश्य के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई।

 

 

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