अलगाववादियों के मुंह पर जोरदार तमाचा… घाटी के 14 नौजवान सिविल सेवा में सफल

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

कश्मीर में अलगावादियों की अपील को मुंहतोड़ जवाब देते हुए घाटी से 14 नौजवानों ने भारतीय सिविल सेवा में सफलता हासिल की है।  घाटी की पहचान गिलानी, यासीन मलिक, बुरहान वानी या सब्जार नहीं हैं। कश्मीरी छात्र इंसानियत,जम्हूरियत और कश्मीरियत की मिसाल पेश कर रहे हैं। इनकी सफलता मुख्यधारा से भटक गए उन युवकों को साफ संदेश है कि बंदूक की गोली से उन उम्मीदों को ना पूरा करो, जो लोग तुम्हारा इस्तेमाल कर रहे हैं। घाटी के नौजवानों की सफलता की हर जगह चर्चा हो रही है।  क्योंकि कश्मीर में स्कूल जलाये जा रहे हैं ,नौजवान पत्थर चला रहे हैं फिर ये टॉपर्स कहाँ से आये ?

कश्मीर में किसान हो या कारोबारी या सरकारी कर्मचारी  अगर स्थिति थोड़ी सी बेहतर है तो वे अपने बच्चो को कश्मीर से बाहर  जरूर भेजते हैं। 2009 में आई ए एस टॉपर शाह फैज़ल ने एक सिलसिला शुरू किया और हर साल कश्मीर से 10 -11 नौजवान आई ए एस में उत्तीर्ण होने लगे।

नेहरू जी से लेकर इंदिरा जी तक केंद्र के टॉप ब्यूरोक्रेटस  में कश्मीर के पंडितों का बोलबाला था। रियासत में भी बड़े अफसरों की सूची में पंडितो की भूमिका अहम् थी। 90 के दशक में आतंकवाद और अलगाववाद ने पहला निशाना पंडितों को और वहां के स्कूलों को बनाया। खौफ के साये से निकलकर लाखों पंडित दिल्ली और दूसरे शहर पलायन कर गए लेकिन शिक्षा में अपनी धाक नहीं बना पाए।

हालाँकि कुछ राज्यों ने उनके बच्चों को सहूलियत देकर बेहतर शिक्षा की जरूर व्यवस्था की। लेकिन इस खालीपन को वहां के संपन्न मुसलमानो ने भरना शुरू किया, शिक्षा ने उन्हें कश्मीर में एक नए फ्यूडल क्लास का दर्जा दिया । स्कूल तो वहां आज भी जलाये जा रहे हैं लेकिन तालीम की रौशनी में वादी के गरीब बच्चे भी आज मुकाम हासिल कर रहे हैं तो यह भारत के विकास की गाथा है

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *