RSS विचारक राकेश सिन्हा ने गरीबों को दान की 5 लाख रुपए की पुरस्कार राशि

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संघ विचारक राकेश सिन्हा ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिली पुरस्कार राशि को गरीबों में दान कर दी है।  30 मई को दीनदयाल जी के नाम का ये पुरस्कार राशि राकेश सिन्हा को राष्ट्रपति भवन में हुए एक कार्यक्रम के दौरान खुद राष्ट्रपति प्रणब  मुखर्जी ने दी थी। जिसके, बाद अब राकेश सिन्हा ने पुरस्कार राशि के रुप में मिली 5 लाख रुपए को गरीबो के लिए दान में दे दी है।

राष्ट्रपति से सम्मानित होने पर राकेश सिन्हा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की…जिसमें उन्गोने साफ लिखा था कि वो अपनी सारी पुरस्कार राशि गरीबों में बांट दी है उन्होने लिखा,  यूं तो सामाजिक जीवनमें सक्रिय लोगो को ऐसे अवार्डो से बचना चाहिए परन्तु अनेक स्तरों पर विमर्श के बाद मैंने इसे स्वीकार किया और एक कारण यह भी रहा कि दीनदयाल जी के नाम से पहली बार विचार/ सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने के लिए दिया गया अवार्ड है। मेरे लिए प. पू. डॉ हेडगेवार जी ,लोकनायक जयप्रकाश जी, दीनदयाल जी हमेशा अपने राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों के कारण रचनात्मक बनने में प्रेरणाश्रोत रहे हैं। डा. जी के पास पूरे राष्ट्र का सपना था लाखो स्वयमसेवको के वे श्रद्धये थे परन्तु घर पर चाय पिलाने तक की भी सामग्री नहीं रहती थी ! दीनदयाल जी का एक प्रसंग है। उन्हें विदेश प्रवास पर जाना था , ठंढ का मौसम. एक कार्यकर्त्ता ने उन्हें कोट भेट की और उन्होंने स्वीकार कर लिया। थोड़ी देर बाद एक दूसरा कार्यकर्त्ता उनसे मिलने आया। कार्यकर्त्ता की आर्थिक हालत उनके शरीर पर पूर्ण कपड़े नहीं होने से अभिव्यक्त हो रहा था। दीनदयाल जी ने उस कोट को तुरंत उसे भेट कर दिया। जे पी कदमकुआं (पटना) से समाज के समर्थन से समाज के लिए जीते रहे। अतः दीनदयाल के नाम से मिला अवार्ड स्वीकार है परन्तु 5 0 0,0 0 0 (पांच लाख ) रुपया जो इस अवार्ड के साथ मिला उसपर मेरा निजी हक नहीं होना चाहिए । यह तो समाज के हाशिये पर जो सभी प्रकार , शारीरिक -मानसिक, परिश्रम करने के बाद भी जीवन की आवश्यकताओ यथा , भोजन, पुत्री की शादी , अस्पताल में चिकित्सा , के लिए जूझतेलोगो को समर्पित होना चाहिए । मूल्य माँ की कोख की तरह होता है और विचार शिशु की तरह। अस्वस्थ कोख स्वस्थ बच्चे को जन्मे नहीं दे सकता है इसलिए मूल्यों का संवर्द्धन ही हर युग और हर विचार के लिए चुनौती होती है। अवार्ड की कामना की जगह दीनदयाल जी के द्वारा स्थापित मापदंडो के अनुकूल बनने की क्षमता और संकल्प शक्ति की कामना ही लक्ष्य होना चाहिए।

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