अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने का मामला: आडवाणी, जोशी और उमा भारती को ज़मानत

 

19 साल पहले अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के मामले में  बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती को फौरी राहत मिली है। मामले में आडवाणी, जोशी और उमा भारती समेत अन्य आरोपियों के ख़िलाफ लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने आरोप तय कर दिए। हालांकि, उससे पहले ही मामले में सभी को ज़मानत मिल गई।

अदालत ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, विश्व हिंदू परिषद के नेता विष्णु हरि डालमिया, उमा भारती, साध्वी ऋृतंभरा, के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 120 बी और डॉ. राम विलास वेदांती, बैकुंण्ठ लाल शर्मा उर्फ प्रेम, चम्पत राय बंसल, महंत नृत्य गोपाल दास, धर्मदास, और सतीश प्रधान के ख़िलाफ़ धारा 120 बी, 153 ए, 153 बी, 295, 295 ए,  505, 147 और 149 आईपीसी का आरोप तय किया ।

वहीं, बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि सभी आरोप राजनीतिक हैं, हम कानूनी तरीके के निपटेंगे।

बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आधार पर लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत में मामले पर रोज़ाना सुनवाई हो रही है, और सर्वोच्च अदालत ने ही सीबीआई कोर्ट को साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय करने के लिए निर्देश दिए थे।

वहीं, 20 मई को हुई सुनवाई के दौरान महंत नृत्य गोपाल दास, महंत राम विलास वेदांती, बैकुंठ लाल शर्मा उर्फ प्रेमजी, चपंत राय बंसल और धर्मदास ने सीबीआई की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया था. इसके बाद इन सभी को कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया था. जबकि इस पिछली सुनवाई में सतीश प्रधान गैरहाजिर थे।

इससे पहले 19 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और विनय कटियार समेत कई वरिष्ठ बीजेपी और वीएसपी नेताओं के ख़िलाफ़ आपराधिक केस चलाने का फ़ैसला सुनाया था।

विवादित ढांचा मामला- कब क्या हुआ ?

6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ढहाए जाने के मामले में दो एफआईआर दर्ज हुई

सीबीआई ने जांच के बाद कुल 49 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया

इन आरोपियों में से अब तक 6 आरोपियों की मौत

कल्याण सिंह अभी राजस्थान के राज्यपाल, नहीं चलाया जा सकता है मुकदमा

 

 

 

 

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