खुल गए केदारनाथ धाम के कपाट.. पीएम मोदी ने किए पहले दर्शन… आप भी लीजिए ‘बाबा’ का आशीर्वाद

जाने केदारनाथ धाम की महिमा

आज सुबह 8 बजे शंखध्वनि और घंटों के नाद के साथ पूरे विधि-विधान से मंत्रोच्चार के साथ बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुले, इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा के पहले दर्शन किए और मंदिर में पूजा-अर्चना की। यही नहीं, केदारनाथ में पीएम मोदी ने छोट्टी बच्ची से मिलने के लिए ना सिर्फ सुरक्षा घेरा तोड़ दिया बल्कि महाराष्ट्र की रहने वाली उस बच्ची से पीेएम मोदी ने मराठी में बात की।

छोटी बच्ची से मिलते हुए पीएम मोदी
छोटी बच्ची से मिलते हुए पीएम मोदी

केदारनाथ धाम उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हिमालय पर्वत की गोद में स्थित है, 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल होने के साथ-साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार विशाल पत्थरों  से कत्यूरी शैली में बने इस मंदिर का निर्माण पांडव वंश के जनमेजय ने करवाया था, जिसके बाद आदि शंकराचार्य ने यहां तपस्या की, मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और बाद में शंकराचार्य ने यहीं पर समाधि ली। हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक यहां पशुपतिनाथ का पिछला हिस्सा विराजित है। मंदिर में स्थित स्वयंभू शिवलिंग को अति प्राचीन और गहन ऊर्जा का केंद्र माना जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत के युद्ध में विजयी होने के बाद पांडव अपने भाईयों की हत्या से लगे पाप का प्रायश्चित करना चाहते थे, और इसके लिए वो भगवान शिव का आशीर्वाद चाहते थे। लेकिन, भोले बाबा पांडवों से रुष्ट थे। भोले बाबा के दर्शन के लिए पांडव काशी गए लेकिन भगवान शिव हिमालय आ गए। ऐसे में लगन के पक्के पांडव भोले बाबा का पीछा करते करते केदारनाथ पहुंच गए , लेकिन भगवान शिव ने उस वक्त बैल का रुप धारण कर लिया और अन्य पशुओं में जा मिले। लेकिन, लगन के पक्के पांडवों ने उनका पीछा किया और पांडवों की भक्ति और दृढ़ संकल्प देखकर भोले बाबा ने पांडवों को दर्शन दिए और पापमुक्त कर दिया। तभी से ही भगवान शिव बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रुप में पूजे जाते हैं। माना जाता है कि भगवान शिव जब अंतर्ध्यान हुए तो उनके धड़ का भाग काठमांडू में प्रकट हुआ। जहां अब पशुपतिनाथ का मंदिर है।

शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मदमदेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए । इसलिए इन चार स्थानों समेत केदारनाथ को पंचकेदार कहा जाता है, यहां शिवजी के भव्य मंदिर बने हुए हैं।

इसके अलावा एक कहानी ये भी है कि, केदार पर्वत पर भगवान विष्णु के अवतार नर और नारायण ऋषि तपस्या करते थे और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां प्रकट हुए और उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने का वरदान दिया।

 

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